

भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण के स्मरण हेतु जैन धर्म मे दीपावली पर्व होता है आयोजित- संजय जैन बड़जात्या
रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां डीग 9783029649
*21 अक्टूबर को 2552 वां निर्वाणोत्सव*
कामां – जैन धर्म में दीपावली का त्योहार अंतिम व चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान महावीर स्वामी ने पावापुरी में निर्वाण अर्थात मोक्ष पद को प्राप्त किया था, जो जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। कार्तिक कृष्ण अमावस्या की भोर में भगवान महावीर को निर्वाण पद की प्राप्ति हुई उसी का स्मरण करने हेतु जैन अनुयायियों द्वारा सम्पूर्ण जैन मंदिरों में प्रातःकालीन बेला में निर्वाण लाडू समर्पित कर मोक्ष पद प्राप्ति की कामना की जाती है।रात्रि को भगवान महावीर के प्रथम गणधर गौतम गणधर को कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई। इसी उपलक्ष्य में ज्ञान की ज्योति व अज्ञानता के निवारण हेतु दीप प्रज्ज्वलित किये जाते हैं। अर्थात दीपो की कतार,श्रंखला व पंक्ति का निर्माण कर प्रकाशित किया जाता है जिसे दिपावली कहा जाता है।
दीपावली के दिन जैन धर्म के अनुयायी भगवान महावीर की पूजा और आरती करते हैं, और उनके जीवन और शिक्षाओं को याद करते हैं। यह त्योहार ज्ञान, प्रकाश, और मोक्ष की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है।
जैन धर्म में दीपावली का महत्व इस प्रकार है:
1. *भगवान महावीर का निर्वाण*: भगवान महावीर के निर्वाण की याद में मनाया जाने वाला त्योहार।
2. *ज्ञान और प्रकाश*: दीपावली के दीपक ज्ञान और प्रकाश के प्रतीक हैं, जो अंधकार और अज्ञान को दूर करते हैं। मन मस्तिष्क में ज्ञान की ज्योति प्रकाशित कर कालिमा को दूर करने का पांवन पर्व ही दीपावली है।
3. *मोक्ष की प्राप्ति*: दीपावली का त्योहार मोक्ष की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है, जो जैन धर्म का अंतिम लक्ष्य है।
इस प्रकार, जैन धर्म में दीपावली का त्योहार भगवान महावीर के निर्वाण की याद में मनाया जाता है और ज्ञान, प्रकाश, और मोक्ष की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण है। इस वर्ष 21 अक्टूबर को प्रातः जैन मंदिरों में निर्वाण लाडू समर्पित कर भगवान महावीर स्वामी का 2552 वां निर्वाणोत्सव मनाया जाएगा।